धनतेरस से भाई दूज तक पाँच दिन। सफ़ाई, रंगोली, रिश्तेदारों का आना-जाना, रात दो बजे तक ताश, सुबह बचे हुए काजू कतली और सोन पापड़ी के डिब्बे। फिर अचानक सोमवार आता है, ऑफ़िस खुलता है, बच्चों का स्कूल शुरू होता है, और शरीर अब भी त्योहार के मूड में होता है। अगर आप सोच रहे हैं कि दिवाली के बाद दिनचर्या कैसे सुधारें, तो पहली बात: आपको शून्य से शुरू करने की ज़रूरत नहीं है। आपकी पुरानी आदतें कहीं गई नहीं हैं, बस उन्हें वापस बुलाना है। और अगर दिवाली अभी आने वाली है, तो नीचे पहले से तैयारी के लिए भी एक हिस्सा है।
30 सेकंड में सार:
- अमेरिका, जर्मनी और जापान, 3 देशों के आँकड़ों में सबसे ज़्यादा वज़न बड़े त्योहारों के आसपास बढ़ता दिखा (Helander et al., Tampere University of Technology, 2016)।
- ब्रिटेन में क्रिसमस के मौसम में 272 वयस्कों पर हुए एक ट्रायल में, जिस समूह को नियमित रूप से वज़न देखने को कहा गया, उसका वज़न तुलना वाले समूह से लगभग 0.5 किलो कम रहा (Mason et al., University of Birmingham, 2018)।
- उस समूह से हफ़्ते में कम से कम 2 बार वज़न देखकर दर्ज करने को कहा गया, और साथ में यह जानकारी दी गई कि त्योहारी खाने की कैलोरी जलाने के लिए कितनी देर चलना पड़ता है, यानी तरीका बेहद सरल था (Mason et al., University of Birmingham, 2018)।
दिवाली के बाद दिनचर्या क्यों बिगड़ जाती है?
त्योहार में तीन चीज़ें एक साथ बदलती हैं: सोने का समय, खाने की मात्रा और घर का माहौल। दिवाली में तीनों बदल जाती हैं। देर रात तक पटाखे और मेहमान, दिन भर मिठाई और नमकीन, और रोज़ की जगह पर अब सजावट, उपहार के डिब्बे और भीड़।
हमारी आदतें इन्हीं संकेतों से चलती हैं। सुबह की सैर इसलिए होती है क्योंकि अलार्म बजता है, जूते दरवाज़े पर रखे होते हैं, और गली में बाकी लोग भी निकलते हैं। त्योहार में ये संकेत गायब हो जाते हैं, इसलिए आदत भी रुक जाती है। यह आपकी इच्छाशक्ति की कमी नहीं, माहौल का बदलाव है।
लीड्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने यूरोप में वज़न संभालने वाले कार्यक्रम के प्रतिभागियों का रोज़ाना वज़न देखा और पाया कि वज़न हफ़्ते के अंत और छुट्टियों के बाद ऊपर जाता है, और यह बढ़त अपने-आप हमेशा पूरी तरह वापस नहीं आती (Turicchi et al., University of Leeds, 2020)। इसलिए दिवाली के बाद का हफ़्ता अहम है: यहीं तय होता है कि छोटी-सी गड़बड़ स्थायी बनेगी या नहीं।
अगर आप तय नहीं कर पा रहे कि आदतें किस ऐप में दर्ज करें, तो 2026 के सबसे अच्छे हैबिट ट्रैकर ऐप वाली तुलना एक अच्छा शुरुआती बिंदु है।
"नई शुरुआत" नहीं, "वापसी": फ़र्क क्यों ज़रूरी है
नए साल या जन्मदिन पर नई शुरुआत का जोश काम आता है। लेकिन दिवाली के बाद की स्थिति अलग है। आपके पास पहले से एक दिनचर्या थी, जो पाँच-सात दिन के लिए रुकी। उसे "नया संकल्प" बनाने से उल्टा दबाव बढ़ता है: बड़े लक्ष्य, सख़्त डाइट, रोज़ एक घंटा जिम, और तीसरे दिन थककर छोड़ देना।
वापसी का मतलब है वही पुराना ढाँचा, बस छोटे रूप में। जो आप दिवाली से पहले करते थे, उसका आधा। हर रोज़ 40 मिनट टहलते थे, तो पहले तीन दिन 20 मिनट। 8 पन्ने पढ़ते थे, तो 4। लक्ष्य प्रदर्शन नहीं, लय लौटाना है।
यह वैसा ही है जैसे गर्मी की छुट्टियों के बाद बच्चे स्कूल में लौटते हैं। पहला हफ़्ता पढ़ाई से ज़्यादा समय पर उठने का अभ्यास होता है। स्कूल खुलने के बाद की दिनचर्या पर हमारा लेख यही तर्क परिवार के स्तर पर समझाता है।
7 दिन में दिनचर्या कैसे सुधारें: आसान प्लान
एक साथ सब ठीक करने की कोशिश सबसे आम गलती है। एक-एक परत लौटाइए।
दिन 1-2: नींद पहले। सोने का समय एक दिन में दो घंटे पीछे करना मुश्किल है। हर रात 30-30 मिनट पहले सोइए और सुबह का अलार्म तय समय पर ही रखिए, चाहे नींद कम हुई हो। सुबह 10 मिनट धूप में बालकनी या छत पर बिताइए।
दिन 2-3: बची मिठाइयों का इंतज़ाम। मिठाई के डिब्बे नज़र के सामने रहेंगे तो हाथ अपने-आप जाएगा। बचे हुए डिब्बे कामवाली दीदी, गार्ड भैया या ऑफ़िस में बाँट दीजिए, बाकी अलमारी में ऊपर रख दीजिए। रसोई के काउंटर पर फल की टोकरी रखिए।
दिन 3-4: खाने का समय वापस। दिन में तीन तय समय पर खाना, और बीच में चाय के साथ नमकीन की जगह भुने चने या फल। दाल-चावल, रोटी-सब्ज़ी जैसा सादा घर का खाना शरीर को सबसे जल्दी सामान्य लय में लाता है।
दिन 4-5: हल्का व्यायाम। पुरानी आदत का आधा हिस्सा। सैर, योग, या सीढ़ियाँ। ज़रूरी यह है कि यह उसी समय और उसी जगह हो, जहाँ दिवाली से पहले होता था, ताकि पुराना संकेत फिर से जुड़ जाए।
दिन 6-7: नापना और दर्ज करना। वज़न, नींद के घंटे, पानी के गिलास, और जो आदतें आप लौटा रहे हैं, उन्हें रोज़ एक जगह दर्ज करें। बर्मिंघम विश्वविद्यालय के ट्रायल में नियमित रूप से वज़न देखना और उसे लिखना उस छोटे-से कार्यक्रम का मुख्य हिस्सा था, और इस समूह का वज़न क्रिसमस के मौसम में तुलना वाले समूह से कम बढ़ा।
अगर बीच में एक दिन छूट जाए, जैसे छठ पूजा की तैयारी या शादी के सीज़न की कोई दावत, तो प्लान रद्द न करें। अगले दिन से फिर उसी जगह से जारी रखें। इस पर हमारा अलग लेख है: एक दिन छूट जाए तो क्या करें।
दिवाली से पहले क्या करें, ताकि बाद में दिक्कत कम हो?
अगर आप यह लेख त्योहार से पहले पढ़ रहे हैं, तो कुछ चीज़ें अभी तय कर लीजिए:
- एक "न्यूनतम" आदत चुनिए जो त्योहार के दिनों में भी चल सके, जैसे सुबह 5 मिनट स्ट्रेचिंग या रात को 10 मिनट टहलना।
- वापसी की तारीख़ कैलेंडर में लिखिए। भाई दूज के अगले दिन से "वापसी हफ़्ता" शुरू।
- मिठाई के डिब्बों का प्लान पहले बनाइए: कितने रखने हैं, कितने बाँटने हैं।
- आराम के दिन पहले से तय कीजिए। त्योहार के दिनों को जानबूझकर छुट्टी मानना, अचानक सब छोड़ देने से कहीं बेहतर है।
TrakBit में रोज़ाना दर्ज करना कैसे मदद करता है
त्योहार के बाद सबसे बड़ी चुनौती यह याद रखना है कि आपकी पुरानी दिनचर्या असल में थी क्या। TrakBit में हर आदत की पूरी हिस्ट्री कैलेंडर में दिखती है, इसलिए आप देख सकते हैं कि अक्टूबर में आप हफ़्ते में कितनी बार सैर करते थे, और उसी को वापसी का लक्ष्य बना सकते हैं।
कुछ बातें जो खास तौर पर काम आती हैं:
- हर आदत के लिए आराम के दिन। आप पहले से तय कर सकते हैं कि किसी आदत के कौन-से दिन आराम के होंगे। उन दिनों स्ट्रीक नहीं टूटती। लेकिन जो दिन आराम के दिन के रूप में सेट नहीं है, उस दिन आदत छूटने पर स्ट्रीक टूट जाती है। इसलिए त्योहार से पहले ही ईमानदारी से आराम के दिन तय कर लें।
- छोटी आदतें, अलग-अलग। "फ़िट रहना" जैसा बड़ा लक्ष्य नहीं, बल्कि "11 बजे तक सोना", "8 गिलास पानी", "20 मिनट सैर" जैसी अलग आदतें, जिन्हें दो सेकंड में टिक किया जा सके।
- रोज़ एक नज़र। सुबह चाय के साथ ऐप खोलकर देखना कि आज कौन-सी आदतें बाकी हैं, अपने-आप में एक संकेत बन जाता है जो दिनचर्या को दिशा देता है।
अपनी वापसी का हफ़्ता आज ही TrakBit हैबिट ट्रैकर में तीन छोटी आदतों के साथ शुरू करें।
निष्कर्ष
दिवाली के बाद दिनचर्या सुधारने के लिए नया संकल्प नहीं, पुरानी लय की वापसी चाहिए। नींद से शुरू कीजिए, मिठाई को नज़र से हटाइए, व्यायाम आधे रूप में लौटाइए, और रोज़ दर्ज कीजिए। एक हफ़्ते में घर फिर से अपनी रफ़्तार पकड़ लेगा, और अगली दिवाली के लिए आपके पास एक आज़माया हुआ प्लान होगा।
स्रोत
- Mason et al., University of Birmingham, 2018. https://doi.org/10.1136/bmj.k4867
- Turicchi et al., University of Leeds, 2020. https://doi.org/10.1371/journal.pone.0232152
- Helander et al., Tampere University of Technology, 2016. https://doi.org/10.1056/nejmc1602012
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दिवाली के बाद दिनचर्या ठीक होने में कितना समय लगता है? हर किसी के लिए अलग है, लेकिन ज़्यादातर लोगों के लिए एक हफ़्ते का ढाँचा काफ़ी होता है: पहले नींद, फिर खाना, फिर व्यायाम। एक साथ सब बदलने की कोशिश न करें।
क्या दिवाली के बाद डिटॉक्स डाइट ज़रूरी है? नहीं। सख़्त डिटॉक्स से ज़्यादा असर रोज़ की छोटी आदतों का होता है: समय पर सोना, पानी, सादा खाना और नियमित रूप से वज़न या आदतें दर्ज करना।
वज़न पर नज़र रखने से सच में फ़र्क पड़ता है? ब्रिटेन में क्रिसमस के मौसम पर हुए बर्मिंघम विश्वविद्यालय के 272 वयस्कों वाले ट्रायल में, जिस समूह ने हफ़्ते में कम से कम दो बार वज़न देखा और दर्ज किया (साथ में कुछ आसान सुझाव भी मिले), उसका वज़न तुलना वाले समूह से लगभग आधा किलो कम रहा।
क्या TrakBit में त्योहार के दिनों से स्ट्रीक टूट जाती है? जो दिन आपने उस आदत के लिए आराम के दिन के रूप में सेट किए हैं, उन पर स्ट्रीक नहीं टूटती। बाकी किसी दिन आदत छूटने पर स्ट्रीक टूट जाती है, इसलिए आराम के दिन पहले से सोच-समझकर तय करें।